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                 किताब और तुम


किताब दुनिया की सबसे पवित्र मित्र होती है। यह तुम्हारा तब तक साथ निभाती है जब तक तुम खुद इसका साथ नहीं छोड़ देते। दुनिया में शायद तुम्हारा कोई ऐसा मित्र ना हो जिसके साथ तुम दिल की बात शेयर कर सको। लेकिन किताब तुम्हारी ऐसा मित्र होती है जो तुम्हारी हर बात में हां में हां मिलाती है। यह तुम्हारा  हर स्थिति   में साथ देती है। यह तुम्हारी हर दुख और सुख की बात सुनने को तैयार रहती है।


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कोई व्यक्ति दुनिया में ऐसा होता है। जो अपने दिल की बात किसी दूसरे के साथ शेयर नहीं कर सकता परंतु मेरे अनुमान से किताब उसका एक ऐसा मित्र होती है जिसके साथ वह अपनी हर दिल की बात सुख और दुख की बात शेयर कर सकता है । दुनिया में बहुत से मित्र ऐसे होते हैं जो तुम्हारी दिल की बातों को किसी दूसरे के सामने बता देते हैं लेकिन किताब तुम्हारा ऐसा मित्र होती है जो तुम्हारी बात तब तक नहीं बताती जब तक तुम खुद नहीं चाहते।


अपने दुखों को कम करनादुख की स्थिति में जब तुम किताब के साथ अपनी बातें शेयर करते हो तब यह तुम्हारे सारे दुख अपने अंदर समा लेती है। यह तुम्हें इतनी शांति देती है जैसे कि तुम मां के आंचल में सो रहे हो। दुनिया में जिस व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता मेरे अनुमान से किताब उसकी दुनिया की सबसे बड़ी मित्र होती है।क्योंकि यह तुम्हारा बचपन से लेकर मरते वक्त तक साथ निभाती है। तुम्हारा हर मंजिल में साथ देती है। यदि तुम्हें कभी दुख की स्थिति देखने को मिले तो अपनी बातें किताब के साथ जरूर शेयर करना और कुछ समय के लिए मन को शांत कर कर महसूस करना। शायद तुम्हें महसूस हो जाए कि तुम्हें किताब से कितनी राहत मिली है।



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सुख की स्थिति में:  यदि तुम कभी बहुत ज्यादा खुश हो तो अपनी खुशी की बात किताब के साथ जरूर शेयर करना। तुम अपने आप को 2 गुना ज्यादा खुश महसूस करोगे। और हां यदि कभी तुम्हें मौका मिले तो अपनी प्यारी किताब को एक बार शांत मन से जरूर गले लगाना शायद तुम उस वक्त किताब को अपनी  दुनिया की सबसे पवित्र मित्र महसूस करोगे।

मुझे नहीं लगता कि किताब से पवित्र भी दुनिया में कोई चीज हो सकती है सिर्फ मां को छोड़कर। क्योंकि यह इतनी पवित्र होती है कि यह  कोई गलत कार्य नहीं करती और हमेशा शांत रहती है।

 मेरे अनुमान से किताब मनुष्य की तुलना में अत्यधिक अच्छी होती है। क्योंकि यह कभी ना तो पाप करती है और ना ही किसी के साथ धोखेबाजी, और ना ही कभी धन के लिए किसी मनुष्य का कत्ल करती है। यह सब अगुण सिर्फ मनुष्य में ही देखने को मिलते हैं। मनुष्य धन दौलत के लिए जानवरों की तरह भटकता फिरता है लेकिन इसे किसी धन दौलत की जरूरत नहीं होती। इसे सिर्फ जिंदगी में एक सच्चे मित्र की जरूरत होती है जो इसका हमेशा साथ निभा सके।


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किताब किसी काम के लिए अपने आप को बुरा भला नहीं कहती जबकि मनुष्य हर काम के लिए अपने आप को दुखी महसूस करता है अपने दुख हो को और बढ़ावा देता है।
मनुष्य किसी काम की गलत हो जाने पर ईश्वर को बुरा भला कहने लगता है। लेकिन इस के साथ जो होता है वह किताब शांत होकर सहन कर लेती है। आपने देखा होगा बहुत से मनुष्य किताबों की जरा भी कदर नहीं करते। वह इन्हें ऐसी जगह पर फेंकते( रखते)हैं । जो जगह इनके लिए किसी भी रूप से अच्छी नहीं होती।जो मनुष्य किताबों के लिए कूड़े कचरे की जगह को अच्छा समझते हैं । मेरे अनुमान से उनसे बड़ा पूरे संसार के अंदर कोई धोखेबाज नहीं हो सकता।

एक बार शांत मन से सोच कर देखो जो मित्र तुम्हारा जीवन भर साथ देने के लिए तैयार हो, जो मित्र तुम्हारी हर मन की बात सुने, जो तुम्हारी हर बात में हां में हां मिलाएं, जो तुम्हें अकेलेपन ना होने का एहसास दिलाए। उसके साथ यदि तुम इस तरह का व्यवहार करते हो तो शायद। तुम से बुरा  दुनिया में कोई नहीं हो सकता।
 
 मेरे अनुमान से दुनिया में कोई ऐसी चीज नहीं जो तुम्हें किताबों से ज्यादा कुछ सीखने को देती हो। यह तुम्हें हर अच्छी और बुरी चीज का ज्ञान कराती है और ज्ञान होने पर ही तुम अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा समझ पाते हो। ज्ञान होने से ही तुम मनुष्य हो। मनुष्य और जानवर के अंदर सिर्फ ज्ञान (अकल) का फर्क होता है।


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पुस्तकों की वजह से ही मनुष्य अकल मंद है।

बिन पुस्तकों के ऐसा समझो जैसे लोहे में जंग है।

पुस्तके जिंदगी की सबसे बडी जीवनसाथी होती है।
दुनिया के अंदर शायद ही कोई किताबों से अच्छा मित्र हो सकता है ।











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